उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में घाघरा और शारदा नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा गहरा गया है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाते हुए राहत एवं बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।
महमूदाबाद के तहसीलदार उमाशंकर त्रिपाठी ने मंगलवार को बताया कि विभिन्न बैराजों से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण दोनों नदियों के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि बनबसा बैराज से 67,022 क्यूसेक, शारदा बैराज से 21,540 क्यूसेक तथा गिरिजा बैराज से 95,357 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे घाघरा और शारदा नदियों का जलस्तर बढ़ा है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल घाघरा नदी खतरे के निशान से 2.03 मीटर तथा शारदा नदी खतरे के निशान से 1.09 मीटर नीचे बह रही है, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
तहसीलदार ने बताया कि रामपुर मथुरा विकासखंड के सुंदरपुरवा गांव में घाघरा नदी की कटान से ग्रामीण धर्मराज का अंतिम मकान नदी में समा गया, जिसके साथ गांव का अस्तित्व भी समाप्त हो गया। प्रभावित परिवार को बांध पर भूमि उपलब्ध करा दी गई है तथा क्षतिपूर्ति के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है।
उन्होंने बताया कि बेहटा विकासखंड के निर्मल पुरवा, आसाराम पुरवा, सोमवारी पुरवा, लोध पुरवा, जंगल टपरी, पासिंग पुरवा समेत लगभग 40 गांवों और उनके मजरों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। वहीं मानपुर और मल्लापुर क्षेत्रों में शारदा नदी लगभग 30 बीघा कृषि भूमि का कटान कर चुकी है।
बिसवां के तहसीलदार अनिल कुमार राम ने बताया कि संभावित बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए चार स्थानों पर अस्थायी आश्रय स्थल तैयार किए गए हैं। कटान अथवा बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर प्रभावित परिवारों को तत्काल वहां विस्थापित किया जाएगा। उधर, लहरपुर की उप जिलाधिकारी धामिनी एस. दास ने लखनीपुर, मानपुर, मल्लापुर और खान मरौड़ गांवों का निरीक्षण कर ग्रामीणों को सतर्क रहने तथा किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल तहसील प्रशासन को सूचना देने के निर्देश दिए।
प्रशासन ने बताया कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 55 नावों की व्यवस्था की गई है तथा जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
सीतापुर में घाघरा और शारदा का जलस्तर बढ़ा, कई गांवों पर बाढ़ का खतरा
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