छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन, नीट पेपर लीक प्रकरण और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर बीते दो दिनों से छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किए।
रायपुर, धमतरी, बीजापुर और राजनांदगांव में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर कठोर कार्रवाई तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई गई। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े युवाओं ने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के छात्र संगठन के पांच कार्यकर्ता—हेमंत पाल, अनुज शुक्ला, इंडिया घृतलहरे, ड्रिंकल और सोनम सोमवार को —अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने खून से “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” लिखकर विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल नहीं हो सके, इसलिए रायपुर में रहकर सोनम वांगचुक और शिक्षा सुधार की मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और युवाओं के भविष्य का आंदोलन है।
धरने में शामिल युवाओं ने कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने, पेपर लीक में शामिल लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करने, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार तथा लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वालों के अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
रविवार को आंदोलन के पहले दिन भी डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर 500 से अधिक छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन कर जिला प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा था।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छात्रों के आंदोलन, वंदे मातरम् से जुड़े प्रस्तावित नए नियम और टीएस सिंहदेव के उनके निवास पहुंचने पर भाजपा की प्रतिक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि संसद की शुरुआत से ही सदन और सड़क दोनों जगह हंगामा देखने को मिल रहा है, जिससे भाजपा का अलोकतांत्रिक चेहरा सामने आया है।
श्री बघेल ने आरोप लगाया कि आंदोलन कर रहे छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज किया गया, जो निंदनीय है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती तो छात्रों से बातचीत कर सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
श्री बघेल के अनुसार सरकार की गलती का खामियाजा 22 लाख युवाओं को भुगतना पड़ रहा है और इस पूरे घटनाक्रम में 22 छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या की है। उन्होंने इन मौतों की नैतिक जिम्मेदारी सरकार पर होने का आरोप लगाया।
छत्तीसगढ़ में सोनम वांगचुक और नीट मुद्दे पर प्रदर्शन तेज
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