कोलकाता
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद ममता बनर्जी को लगातार झटके पर झटका मिल रहा है. कोलकाता हाईकोर्ट ने सोमवार (20 जुलाई) को तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट को प्रवर्तन निदेशालय की ओर से फ्रीज किए गए पार्टी के तीन बैंक खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया. ईडी ने तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों को फ्रीज किया था, जिनमें कुल 440.42 करोड़ रुपये जमा थे. यह कार्रवाई राज्य पुलिस की एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के तहत की गई. मामले में कथित वित्तीय गड़बड़ियों, अवैध रूप से धन जुटाने और पार्टी के कुछ बैंक खातों के जरिए संदिग्ध रकम के लेनदेन की जांच की जा रही है।
मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने 13 जुलाई को अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया था. सोमवार को अदालत ने ममता बनर्जी गुट की अंतरिम राहत की मांग खारिज कर दी।
पिछली सुनवाई में कोर्ट की टिप्पणी
इस दौरान अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई थी कि एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद इतनी जल्दी में खाते फ्रीज क्यों किए गए। कोर्ट ने टिप्पणी की थी, “18 जून को FIR दर्ज हुई और अगले ही दिन 19 जून को आनन-फानन में खाते फ्रीज कर दिए गए। इस शुरुआती स्टेज पर कोर्ट को ऐसा कोई ठोस आधार या सबूत नहीं दिख रहा, जिसके दम पर इतनी हड़बड़ी में यह कदम उठाया गया।” कोर्ट ने यह भी कहा था कि जब आम नागरिक पुलिस के पास जाते हैं, तब तो ऐसी तत्परता शायद ही कभी देखने को मिलती है।
पैसे निकालने के लिए रखी गई थीं शर्तें
तब कोर्ट ने कहा था कि पार्टी इन खातों से सिर्फ अपने दिन-प्रतिदिन के कामकाज का खर्च ही निकाल पाएगी। इसके अलावा, किसी अन्य काम के लिए पैसे नहीं निकाले जा सकेंगे। बैंक में चेक जमा करने से पहले उस पर TMC के दो अधिकृत पदाधिकारियों के हस्ताक्षर होने चाहिए। पदाधिकारियों के साइन के बाद उस चेक पर स्पेशल ऑफिसर (रिटायर्ड जज) के भी काउंटर-सिग्नेचर होने जरूरी हैं।
क्या है पूरा मामला?
राज्य पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों को ईडी ने 440.42 करोड़ रुपये की राशि के साथ फ्रीज कर दिया है। यह कार्रवाई पार्टी के कुछ बैंक खातों के माध्यम से कथित बेईमान वित्तीय लेनदेन, अवैध रूप से धन संग्रह और संदिग्ध धन के हस्तांतरण के संबंध में की गई जांच के सिलसिले में की गई है।
ईडी के जांच में क्या मिला?
मामले में पक्षों की दलीलें समाप्त होने के बाद न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने 13 जुलाई को प्रार्थना पर अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया था।अधिकारियों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि अप्रैल 2023 और जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसकी संबंधित इकाई को लगभग 160 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए थे।
कंपनी पर क्या आरोप है?
कंपनी पर आरोप है कि उसने 2023 और 2026 के बीच 82.96 करोड़ रुपये एक अन्य नवगठित इकाई को हस्तांतरित किए। यह पाया गया कि इस इकाई को एक बड़ी राशि हस्तांतरित की गई थी।अधिकारियों ने बताया कि इसमें से 112 करोड़ रुपये का इस्तेमाल एम्ब्रेयर लेगेसी 600 बिजनेस जेट और अगस्तावेस्टलैंड 109एसपी हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए किया गया था।
क्या हैं आरोप?
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, ईडी की शुरुआती जांच में सामने आया कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से करीब 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी एक अन्य इकाई को ट्रांसफर किए गए. जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने 2023 से 2026 के बीच 82.96 करोड़ रुपये एक अन्य नई कंपनी को ट्रांसफर किए. अधिकारियों के मुताबिक, इस कंपनी को बड़ी रकम भेजी गई थी. जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से 112 करोड़ रुपये का इस्तेमाल एम्ब्रेयर लेगेसी 600 बिजनेस जेट और अगस्तावेस्टलैंड 109SP हेलीकॉप्टर खरीदने में किया गया।